8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग का इंतजार कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए सैलरी बढ़ोतरी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अभी सरकार की तरफ से आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन महंगाई के ताजा आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि नई सैलरी तय करने वाला फिटमेंट फैक्टर न्यूनतम स्तर पर कहां तक जा सकता है। इसी वजह से कर्मचारियों के बीच अपनी भविष्य की सैलरी को लेकर गणनाएं शुरू हो चुकी हैं।
फिटमेंट फैक्टर क्या होता है और सैलरी कैसे तय होती है
जब भी नया वेतन आयोग लागू होता है, तो मौजूदा बेसिक सैलरी को एक तय गुणक से गुणा किया जाता है, इसी गुणक को फिटमेंट फैक्टर कहा जाता है। इसी के आधार पर नई बेसिक सैलरी तय होती है। उदाहरण के तौर पर 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था, जिसके चलते ₹7,000 की बेसिक सैलरी सीधे ₹18,000 पहुंच गई थी। अब 8वें वेतन आयोग में जिस 1.60 फिटमेंट फैक्टर की चर्चा हो रही है, वह न्यूनतम आधार माना जा रहा है।
1.60 फिटमेंट फैक्टर से कितनी बढ़ सकती है सैलरी
अगर 1.60 को न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर माना जाए, तो भी सैलरी में बढ़ोतरी तय है। लेकिन अगर सरकार 7वें वेतन आयोग की तरह ज्यादा फैक्टर तय करती है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। मौजूदा ₹18,000 की न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़कर ₹34,000 से ₹50,000 के आसपास पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इसका फायदा सिर्फ कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि पेंशनर्स को भी मिलेगा, क्योंकि उनकी मूल पेंशन भी इसी फैक्टर से बढ़ेगी।
महंगाई भत्ते के आंकड़े क्यों अहम हैं
दिसंबर 2025 के CPI-IW आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2026 से महंगाई भत्ते में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है। इसके बाद कुल डीए 60 प्रतिशत के आसपास पहुंच जाएगा। नियमों के अनुसार जब डीए 60 प्रतिशत हो जाता है, तो बेसिक और डीए को मिलाकर कुल वैल्यू 1.60 हो जाती है। इसी वजह से जानकार मानते हैं कि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.60 से कम रखना मुश्किल होगा।
1.60 सिर्फ आधार क्यों माना जा रहा है
असल में 1.60 को केवल बेस लेवल माना जा रहा है, अंतिम आंकड़ा इससे ज्यादा हो सकता है। इसकी एक बड़ी वजह कोरोना काल में 18 महीने का डीए फ्रीज होना है, जिसकी भरपाई कर्मचारियों को अब तक नहीं मिली। इसके अलावा वेतन आयोग लागू होने में समय लगता है। अगर 8वां वेतन आयोग जनवरी 2026 से माना जाए, तो इसके पूरी तरह लागू होने तक डीए की कई और किस्तें जुड़ सकती हैं, जिससे डीए 80 से 90 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। ऐसे में फिटमेंट फैक्टर 1.9 या 2 के आसपास भी जा सकता है। कर्मचारी संगठन तो इसे 2.86 से 3.25 तक रखने की मांग कर रहे हैं।
पुराने वेतन आयोगों का रिकॉर्ड क्या कहता है
पिछले वेतन आयोगों पर नजर डालें तो हर बार कर्मचारियों को अच्छी बढ़ोतरी मिली है। 6वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.92 था, जबकि 7वें वेतन आयोग में इसे बढ़ाकर 2.57 कर दिया गया। इसी वजह से इस बार भी कर्मचारियों को उम्मीद है कि सरकार महंगाई और बीते वर्षों के नुकसान को ध्यान में रखते हुए बेहतर फैसला लेगी।
फिटमेंट फैक्टर पर अंतिम फैसला कब आएगा
फिटमेंट फैक्टर कितना होगा, इसका अंतिम निर्णय सरकार की आर्थिक स्थिति और कर्मचारियों की मांगों को देखते हुए लिया जाएगा। फिलहाल 1.60 को न्यूनतम आधार माना जा रहा है, लेकिन इससे ऊपर जाने की पूरी संभावना है। माना जा रहा है कि मार्च 2026 के आसपास कैबिनेट स्तर पर इस पर कोई बड़ा अपडेट सामने आ सकता है, जिसके बाद 8वें वेतन आयोग की तस्वीर और साफ हो जाएगी।